Ud Jaa Kaale Kaanvaan O Ghar Aajaa Paradesii Lyrics – Gadar – Ek Prem Katha

The song “Ud Jaa Kaale Kaanvaan O Ghar Aajaa Paradesii” from the movie Gadar – Ek Prem Katha is a famous Song, sung by Alka Yagnik. The song is composed by Uttam Singh with lyrics written by Anand Bakshi.

Movie: Gadar – Ek Prem Katha
Singer(s): Alka Yagnik
Musician(s): Uttam Singh
Lyrics: Anand Bakshi

Ud Jaa Kaale Kaanvaan O Ghar Aajaa Paradesii Song Lyrics-Gadar – Ek Prem Katha

उड़ जा काले कांवां तेरे मुँह विच खंड पावां
ले जा तू संदेसा मेरा मैं सदके जावां
बागों में फिर पड़ गए झूले पक गइयां मिठियां अ.म्बियां
ये छोटी सी ज़िंदगी ते रातां लम्बियां लम्बियां
ओ घर आजा परदेसी के तेरी मेरी इक जिंदड़ी

हो हो छम छम करता आया मौसम प्यार के गीतों का
रस्ते पे अँखियाँ रस्ता देखें बिछड़े मीतों का
सारी सारी रात जगाएं मुझको तेरी यादें
मेरे सारे गीत बने मेरे दिल की फ़रियादें
ओ घर आजा परदेसी …

उड़ जा काले कांवां तेरे मुँह विच खंड पावां
ले जा तू संदेसा मेरा मैं सदके जावां
बागों में फिर पड़ गए झूले पक गइयां मिठियां अ.म्बियां
ये छोटी सी ज़िंदगी ते रातां लम्बियां लम्बियां
ओ घर आजा परदेसी के तेरी मेरी इक जिंदड़ी

हो हो कितनी दर्द भरी है तेरी मेरी प्रेम कहानी
सात समुंदर जितना अपनी आँखों में है पानी
मैं दिल से दिल मुझसे करता हो
मैं दिल से दिल मुझसे करता है जब तेरी बातें
सावन आने से पहले हो जाती हैं बरसातें
ओ घर आजा परदेसी …

परवत कितने ऊँचे कितने गहरे होते हैं ओ
कुछ मत पूछो प्यार पे कितने पहरे होते हैं
इश्क़ में जाने क्या हो जाता है ये रब ही जाने
तोड़ के सारी दीवारें मिल जाते हैं दीवाने
ओ ले जा मुझे परदेसी के तेरी मेरी इक जिंदड़ी
हाँ ले जा मुझे परदेसी …

उड़ जा काले कांवां तेरे मुँह विच खंड पावां
ले जा तू संदेसा मेरा मैं सदके जावां
बागों में फिर पड़ गए झूले पक गइयां मिठियां अ.म्बियां
ये छोटी सी ज़िंदगी ते रातां लम्बियां लम्बियां
ओ घर आजा परदेसी के तेरी मेरी इक जिंदड़ी

छम छम करता आया मौसम प्यार के गीतों का हो
रस्ते पे अँखियाँ रस्ता देखें बिछड़े मीतों का
आज मिलन की रात न छेड़ो बात जुदाई वाली
मैं चुप तू चुप प्यार सुने बस प्यार ही बोले खाली
ओ घर आजा परदेसी …

ओ मितरा ओ यारा यारी तोड़के मत जाना हो
मैने जग छोड़ा तू मुझको छोड़के मत जाना
ऐसा हो नहीं सकता हो जाए तो मत घबराना
मैं दौड़ी आऊंगी तू बस इक आवाज़ लगाना
ओ घर आजा परदेसी …

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